December 2, 2022

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बूचा ही नहीं दुनिया के इन शहरों को भी पुतिन कर चुके हैं तबाह

यूक्रेन के बूचा शहर में आम लोगों की बर्बरता से हत्या के बाद एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन चर्चा में हैं। रूसी सेना पर बूचा शहर में 410 आम नागरिकों की हत्या करने का आरोप है। आम नागरिकों को टैंकों तले कुचला गया है। यहां सामूहिक कब्रें भी मिली हैं।

देखा जाए तो ये पहली बार नहीं है जब पुतिन के राज में रूसी सैनिकों ने किसी शहर में ऐसी तबाही मचाई हो। इससे पहले भी चेचन्या में विद्रोहियों के खिलाफ युद्ध के दौरान ग्रोजनी शहर और सीरिया के अलेप्पो शहर में भी ​​​​​​​नरसंहार के ऐसे खौफनाक मंजर देखने को मिले थे।

बूचा शहर में सैकड़ों लोगों के शव एक महीने से खुले में सड़क पर पड़े थे

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव से 37 किलोमीटर दूर बूचा शहर से 1 अप्रैल को अपनी पूरी सेना वापस बुला ली। इसके बाद वहां हर तरफ रूसी सेना की बर्बरता की कार्रवाई के निशान नजर आ रहे हें। यहां की सड़कें लाशों से पटी हैं और ध्वस्त टैंकरों का अंबार लगा हुआ है।
बूचा के मेयर अनातोली फेदरूक का कहना है कि शहर में तीन सौ शव बरामद हुए हैं। एक अन्य अधिकारी के मुताबिक 410 लोगों की जानें गई हैं। वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को UN में कहा आम नागरिकों को टैंकों तले कुचला गया है। महिलाओं के साथ उनके बच्चों के सामने बलात्कार हुआ।
रूस की रणनीति बूचा शहर के जरिए कीव पर कब्जा करने की थी। हालांकि, यूक्रेन के सैनिकों के मजबूती से डटे रहने के कारण रूसी सेना को यहां से अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। रूस ने बूचा शहर में नरसंहार के आरोपों को खारिज किया है। बूचा की तस्वीरों और वीडियो को उसने यूक्रेन की भड़काऊ कार्रवाई बताया है।

पहले भी पुतिन इस तरह की रणनीति अपना चुके हैं

रूस भले ही बूचा शहर में नरसंहार के आरोपों को खारिज कर रहा हो, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन पहले भी युद्ध के दौरान ऐसी रणनीति अपना चुके हैं।
माना जाता है कि युद्ध के दौरान पुतिन नागरिकों की अंधाधुंध हत्या और इंफ्रास्ट्रक्चर का विनाश करने से भी नहीं कतराते हैं।
इसके सबूत पुतिन के पिछले दो अभियानों में भी देखने को मिले हैं। पहला 1999 में चेचन्या के ग्रोजनी शहर में मुस्लिम रिबेल्स के खिलाफ और 2016 में सीरिया के अलेप्पो शहर में रूसी बमबारी ने पूरे शहर को बर्बाद कर दिया था।