July 3, 2022

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इस मुद्दे पर एक साथ आये भारत और पाकिस्‍तान

अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में ईरान की निंदा वाले वाले प्रस्‍ताव से भारत दूर रहा। पाकिस्‍तान और लीबिया की तरह भारत ने भी वोटिंग में हिस्‍सा नहीं लिया। IAEA में ईरान को उसके परमाणु सुरक्षा मुद्दों के लिए निंदा करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। अमेरिका, यूके, फ्रांस और जर्मनी की ओर से ड्राफ्ट किए गए प्रस्‍ताव के समर्थन में 30 वोट पड़े। IAEA की ताजा रिपोर्ट के बाद चारों देश यह प्रस्‍ताव लेकर आए थे। अमेरिका ने कहा कि ईरान ने तीन अघोषित स्थलों पर यूरेनियम कणों को ‘तकनीकी रूप से विश्वसनीय स्पष्टीकरण’ प्रदान नहीं किया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने रिपोर्टों को खारिज कर दिया। रूस और चीन ने प्रस्‍ताव के खिलाफ मतदान किया। IAEA में ईरान के खिलाफ प्रस्‍ताव पर वोटिंग ऐसे वक्‍त में हुई जब वहां के विदेश मंत्री भारत में मौजूद थे। वोटिंग से दूर रहकर भारत का महत्‍वपूर्ण अंतरराष्‍ट्रीय मुद्दों पर अमेरिका से मतभेद का ताजा उदाहरण है।
ईरान परमाणु स्थलों से हटाएगा 27 कैमरे
वियना स्थित IAEA ने कहा कि ईरान ने बताया है कि वह अपनी परमाणु सुविधाओं से 27 निगरानी कैमरे हटा रहा है। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने गुरुवार देर रात कहा कि यह कदम 2015 के ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं के लिए ‘घातक झटका’ होगा। ईरान का यह कदम बुधवार को IAEA बोर्ड की बैठक के एक दिन बाद आया है। ईरानी अधिकारियों ने रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने किसी भी तरह की गुप्त और अपंजीकृत परमाणु गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया। ग्रॉसी ने कहा कि देश के ताजा कदम के बाद ईरान में 40 से अधिक निगरानी कैमरे चालू रहेंगे।

समझौते पर हस्ताक्षर करने पर, ईरान अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर सहमत हुआ। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मई 2018 में समझौते से हाथ खींच लिया और ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगा दिए, जिससे तेहरान ने जेसीपीओए के तहत अपनी कुछ परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम कर दिया। समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए अप्रैल 2021 से ईरान और शेष जेसीपीओए पार्टियों- चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और जर्मनी के बीच वियना में आठ दौर की बातचीत हो चुकी है। मार्च के मध्य से वार्ता रुकी हुई है।