November 21, 2022

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टेंशन में आई दुनिया: चीन के शंघाई शहर में दो साल बाद लगा सबसे बड़ा कोरोना लॉकडाउन

चीन के शंघाई शहर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया है। शंघाई की करीब 1 करोड़ जनता दो साल बाद इस समय बेहद सख्‍त लॉकडाउन के दौर से गुजर रही है। चीन में कोरोना को रोकने के लिए यह सख्‍त लॉकडाउन ऐसे समय पर लगाया गया है जब दुनिया अब इस महामारी के साथ जीना सीख चुकी है। कोरोना के ओमीक्रोन वेरिएंट से दुनिया में उतनी घबराहट नहीं है जितना कि चीन परेशान है। चीन ने कोरोना से बचने के लिए शंघाई शहर में लॉकडाउन लगा दिया है लेकिन ड्रैगन के इस फैसले से दुनिया की टेंशन बढ़ गई है। आइए समझते हैं पूरा मामला….

चीन के सख्‍त लॉकडाउन की नीति से दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था और वित्‍तीय बाजार संकट में जा रहे हैं। वह भी तब भी रूस और यूक्रेन में युद्ध चल रहा है और दुनिया में महंगाई आसमान छू रही है। चीन ने शंघाई में व्‍यापक टेस्टिंग शुरू की है। चीन के इस ऐलान से दुनियाभर में खलबली मच गई। तेल के दामों में तेजी से गिरावट आई है। व्‍यापारियों को डर है कि इस लॉकडाउन से डिमांड में कमी आ सकती है। चीन एक बड़ा तेल आयातक देश है और हर दिन 1.1 करोड़ बैरल तेल को खरीदता है।

दुनिया में सामानों की कीमत और ज्‍यादा बढ़ जाएगी!
इसके अलावा शेयर बाजार भी लॉकडाउन के ऐलान से गिर गया है। चीन का शंघाई शहर न केवल अपनी विशाल आबादी की वजह से बल्कि अपने वित्‍तीय और आर्थिक संबंधों की वजह से दुनिया के लिए महत्‍वपूर्ण है। दुनिया की फैक्‍ट्री कहे जाने वाले चीन का शंघाई शहर देश के कुल आर्थिक आउटपुट का 4 फीसदी है। चीनी अर्थव्‍यवस्‍था का बड़ा हब होने की वजह से इसका अप्रत्‍यक्ष असर बहुत ज्‍यादा हो सकता है। लॉकडाउन की वजह से यह अनिश्चितता फैल गई है कि चीन अब कोरोना के खिलाफ जंग में आगे क्‍या करेगा।

यही नहीं शंघाई में लॉकडाउन की वजह से चीन के आर्थिक विकास दर को भी खतरा पैदा हो गया है जो 5.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है जो पिछले 3 दशक में सबसे कम है। चीन के एक विशेषज्ञ हू कहते हैं, ‘चीन के अगले कुछ सप्‍ताह में कोरोना वायरस पर काबू पाने की संभावना है क्‍योंकि लॉकडाउन प्रभावी है। लेकिन इसका देश के विकास पर पूरे साल बहुत ज्‍यादा असर पड़ता है क्‍योंकि लॉकडाउन बहुत खर्चीला है।’ यह लॉकडाउन ऐसे समय पर लगाया गया है जब देश में रियल स्‍टेट सेक्‍टर बहुत बुरी हालत से जूझ रहा है। चीन के इस संकट से दुन‍िया इसलिए टेंशन में है कि कहीं सामानों की आवाजाही लॉकडाउन की वजह से प्रभावित न हो जाए। अगर ऐसा होता है तो दुनिया में सामानों की कीमत और ज्‍यादा बढ़ जाएगी।