February 28, 2024

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मुंबई: वर्षोवा के नाट्यगृह क्रिएटिव अड्डा मैं नाटक बगिया बाँछाराम की का सफल मंचन किया गया इस नाटक की बेतरीन प्रस्तुति लेट्स विन द हार्ट थिएटर सोसाइटी द्वारा की गई तथा इसके आयोजक रॉयल मेमोरीज फिल्म्स हैं
सान्त्वना निगम द्वारा हिन्दी में अनूदित मनोज मित्र की इस बांग्ला नाट्यकृति को एक सार्थक रूपक की तरह ग्रहण किया जा सकता है । अर्थात बगिया है। समूचा हिन्दुस्तान और बाँछा उसे पाल-पोसकर गुलजार करनेवाला प्रत्येक मेहनतकश । इसके बाद यह समझना आसान है कि छ: कौड़ी और नौकोड़ी की भूमिका इस देश में कौन अदा कर रहा है ।

प्रकटतः यह नाटक वर्तमान सामन्ती पूँजीवादी समाज में जन साधारण की आर्थिक लूट, उसकी त्रासदी और जिजीविषा का जीवन्त दस्तावेज़ है । बांछाराम एक किसान है । जवानी के पसीने से सींचकर उसने एक बगिया लगायी है, लेकिन आज अपने बुढ़ापे के बावजूद बगिया से उसका प्यार और लगाव बूढ़ा नहीं हुआ है । वह अभी भी उसकी हिफ़ाज़त के लिए चौकन्ना है । गाँव का जमींदार छ: कौड़ी बगिया को हथियाने की लालसा लिये मरकर भूत बन गया, बाँछा का अपना घेवता नाराज होकर परदेस चला गया और छःकोड़ी का बेटा नौकोड़ी भी उसे कब्जाना चाहता है । बाँछा दिन-दिन अशक्त होता जा रहा है, रोगों ने उसे घेर रखा है। नौकोड़ी इस अवसर का फायदा उठाना चाहता है । उसने बांछा से कहा कि वह उसे दो सौ रुपये प्रति माह देता रहेगा, बशर्ते बाँछा उसे लिखकर दे कि मरने पर बगिया नौकौड़ी की जायदाद होगी । बेचारगी, बीमारी और आर्थिक अभाव से त्रस्त बछा इस पर राजी हो गया। इसी बीच लोटा बछा का घेता अपनी दुल्हन समेत । देखकर बौछा का मन हरा हो गया और कुछ ही दिनों की सेवा- टहल से देह भी हरियाने लगी, हालाँकि नौकौड़ी के पैसे पर जिन्दा रहना उसके ईमान और नैतिकता को बेहद चुभ रहा था। लेकिन जब उसने यह सुना कि कुछ ही महीने बाद वह परनाना बननेवाला है तो बगिया के बिरवों की तरह ही बच्चे को बड़ा होते देखने की उसकी लालसा जाग उठी । उसने संकल्प किया कि वह जियेगा । और बाँछाराम के बहाने मेहनती वर्ग के जीने और संघर्ष करने के इस संकल्प मात्र ने नौकोड़ी की सांस रोक दी !

वस्तुतः अपनी विषयवस्तु और प्रस्तुति के लिए बहुचर्चित इस नाटक की सोद्देश्यता को संक्षेप में कहें तो दुखों और दुख देनेवालों के तमाम षड्यन्त्रों के बावजूद यदि जिन्दा रहने का संकल्प कर लिया जाय तो हमारा और हमारी भावी पीढ़ी का सुख कोई भी नौकौड़ी छीन नहीं सकेगा ।

नाटक में अभिनय
नाटक में ऑनस्टेज कलाकारों में
लोटन छोटन के किरदार में कृष्णा चौधरी, मुख्तार और चोर की भूमिका में अमित शर्मा,गोपी की भूमिका में मनोज त्यागी (मोंटी ) पदमा की भूमिका में अनीशा चौहान, बांछाराम की भूमिका में गौरव त्रिपाठी, छैकोड़ी की भूमिका में सोहन साहू, ज्योतिष और पंडित की भूमिका में रामानुज कुमार, मालकिन की भूमिका में जय श्री काशीनाथ मोरे, और नौकोड़ी की भूमिका में राजकुमार अहिरवार ने अभिनय किया कुल मिला के सारे कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के समक्ष एक बेहतरीन प्रस्तुति पेश की
वही बैकस्टेज कलाकारों में
लाइट की है विवेक त्रिवेदी और प्रखर सक्सेना ने
म्यूजिक किया है राम अहीरवार ने
स्टेज.सेट किया है बाला, राजीव मैकले, दीपक कुमार दीवाना ने
मेकअप और कॉस्टयूम की जिम्मेदारी संभाली ज्योति पारछा ने
बैकस्टेज नाटक की जान होती है जिसमें जरा सा भी ढीलापन आ जाएं तो नाटक बिखर जाता है
लेकिन इस नाटक के बैकस्टेज कलाकारों ने अपने काम को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया जिसकी वजह से नाटक में जो कसावट आई उससे नाटक ने निखर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया