September 23, 2022

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नूपुर शर्मा का पाकिस्‍तानी मौलाना ने किया समर्थन, कहा- पैगंबर पर बयान के लिए मुस्लिम ने भड़काया

बीजेपी की निलंबित प्रवक्‍ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्‍मद साहब को लेकर दिए बयान पर भारत से लेकर मुस्लिम देशों में बवाल मचा हुआ है। पूरे मामले में नूपुर शर्मा को ही दोषी ठहराया जा रहा है, वहीं बहस में शामिल मुस्लिम पैनलिस्‍ट तसलीम अहमद रहमानी को लेकर कोई बहस नहीं हो रही है। इस बीच पाकिस्‍तान के एक चर्चित मौलाना इंजीनियर मोहम्‍मद अली ने खुलकर नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। मौलाना अली ने कहा कि मुस्लिम पैनल‍िस्‍ट ने पहले नूपुर शर्मा को भड़काया और इसके जवाब में बीजेपी की निलंबित नेता ने पैगंबर के बारे में टिप्‍पणी की।पाकिस्‍तानी मौलाना ने कहा कि पहला मुजरिम वह मुसलमान है ज‍िसने किसी के धर्म के बारे में लाइव टीवी में बात की है। मौलाना अली ने कहा कि हमें इस पूरे विवाद में पूरे माहौल को देखना होगा। उन्‍होंने कहा कि नूपुर शर्मा के बयान के अंदाज से यह पता चल जाएगा कि वह पलटवार कर रही है। नूपुर शर्मा ने कहा कि अगर आप इस तरह से बात करेंगे तो हम भी ये कहेंगे। उन्‍होंने कहा कि पहला मुजरिम वह मुसलमान है जिसने किसी के धर्म के बारे में लाइव टीवी प्रोग्राम में बात की।किसी धर्म का मजाक उड़ाना कुरान के मुताबिक सही नहीं: मौलाना
मौलाना इंजीनियर मोहम्‍मद अली ने कहा कि यह कुरान के मुताबिक नहीं है कि आप किसी के धर्म के बारे में मजाक उड़ाएं जबकि वह आपका कोई विरोधी धर्म हो। पाकिस्‍तानी मौलाना ने कहा कि दूसरे धर्म के लोगों के साथ बहस करते समय हमें भाषा का ध्‍यान रखना चाहिए और अल्‍लाह ने हमें इसका संदेश दिया है। मौलाना अली ने कहा क‍ि नूपुर विवाद में अरब देशों के लोग एसी में बैठकर माहौल को भड़का रहे हैं जबकि भारत में लोग भीषण गर्मी में प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस वाले उन्‍हें जवाब दे रहे हैं।पाकिस्‍तानी मौलाना ने कहा कि यह मूलत: एक अंतरराष्‍ट्रीय राजनीति है। इमरान खान कहते थे कि भारत अमेरिका से भी ले रहा है और रूस से भी ले रहा है। अब भारत और इमरान खान को पता चल गया होगा कि अमेरिका जिसे चाहे उसे झुका सकता है। उन्‍होंने कहा कि अरब देश उनके गुलाम हैं जिनकी रूस से नहीं बनती है। इन देशों ने अरब देशों को भारत के खिलाफ उकसाया। इससे पहले कई बड़े-बड़े मामले आए हैं जिन पर अरब देशों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब रूस को लेकर भारत पर दबाव बनाने के लिए अरब देशों को उकसाया गया।