July 2, 2022

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विपक्ष की अगुवाई के लिए AAP बनी सबसे बड़ी चुनौती

विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद कांग्रेस अब अस्तित्व के संकट के साथ ही विपक्ष के खेमे की अगुवा होने की अपनी भूमिका को बचाए रखने की चुनौती का भी सामना कर रही है. उसके सामने यह चुनौती आम आदमी पार्टी की पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के कारण खड़ी हुई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की राह बहुत मुश्किल होने जा रही है क्योंकि पार्टी ‘आईसीयू’ में है और इसमें नयी जान फूंकने का कोई त्वरित उपाय नहीं है. आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में 92 सीटें हासिल करके न सिर्फ प्रचंड जीत हासिल की, बल्कि कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की जड़ें भी उखाड़ दीं.

दो प्रदेशों में रही गई कांग्रेस की सरकार

कांग्रेस ने न सिर्फ पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य की सत्ता गंवाई, बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भी उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी.पंजाब में जीत के साथ ही आप के पास दो प्रदेशों की सत्ता आ गई है. कांग्रेस की भी अब सिर्फ दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता है. महाराष्ट्र और झारखंड की गठबंधन सरकारों में वह एक कनिष्ठ साझेदार की भूमिका में है.
पंजाब में आप के शानदार प्रदर्शन पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है, ‘‘आप की जीत शानदार है और इसकी सराहना करने की जरूरत है. जो भी विपक्षी दल भाजपा को कड़ी टक्कर दे, उसका समर्थन किया जाना चाहिए.’’ राज्यसभा सदस्य प्रियंका ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह कांग्रेस के लिए चुनौती होगी या नहीं, इस बारे में कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है…विपक्ष को मजबूत करने की जरूरत है.’’

‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज’ (सीएसडीएस) के सह-निदेशक संजय कुमार ने कहा कि आप के विस्तार से विपक्षी खेमे के अगुवा की कांग्रेस की भूमिका के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को इसका अहसास होना चाहिए कि जिस राज्य में आप ने पैठ बनाई है, वहां उसने व्यापक स्तर पर पैठ बनाई है…उन्होंने दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस की कीमत पर पैठ बनाई है.’’

कुमार ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को चिकित्सीय शब्दावली में समझाते हुए कहा, ‘‘अगर किसी की बांह की हड्डी टूटी है तो वह हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास जाता है, अगर कोई और बीमारी है तो व्यक्ति संबंधित रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाता है, लेकिन अगर मरीज की हालत गंभीर है तो वह आईसीयू में होता है तथा उसका इलाज सभी तरह के विशेषज्ञ चिकित्सक करते हैं. कांग्रेस अब आईसीयू में पड़ी नजर आती है.’’