July 2, 2022

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महाराष्ट्र में सियासी भूचाल के बीच ‘ऑपरेशन कमल’ की आहट!

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी भूचाल आने के बाद से बीजेपी (BJP) का ऑपरेशन लोटस (Operation Lotus) एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यहां शिवसेना (Shivsena) के मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) बगावत पर उतर आए हैं और गुवाहाटी (Guwahati) में कई विधायकों के साथ डेरा जमाए हुए हैं. महाराष्ट्र में ऑपरेशन लोटस शुरू किया गया है या नहीं इस पर चर्चा हो रही है. बीजेपी पर विपक्षी दल आरोप लगाते आए हैं कि उसने ऑपरेशन लोटस के तहत कई राज्यों में सरकार बनाई है. तो आइए जानते हैं कहां से इसकी शुरूआत हुई, कब और कहां-कहां इसका प्रयोग कर सरकार बनाने का आरोप लगा.

दरअसल ऐसा मानना है कि एक पार्टी दूसरी पार्टी के विधायकों को लालच देकर अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करती है. अगर ऐसा संभव हो पाता है तो विधानसभा में सत्ताधारी पार्टी का संख्याबल कम हो जाता है और समीकरण बदल जाते हैं. ऐसे में विपक्ष में बैठी पार्टी के पास सत्ता में वापसी का रास्ता खुल जाता है.

ऑपरेशन लोटस सबसे पहले साल 2004 में चर्चा में आया था जब बीजेपी ने कर्नाटक में धरम सिंह की सरकार गिराने की कोशिश की थी. तब विपक्ष ने ही इसे ऑपरेशन लोटस का नाम दिया था. फिर ये मीडिया के जरिए खूब प्रचारित किया गया. इसके बाद साल 2008 में इस ऑपरेशन के तहत बीजेपी ने कर्नाटक में सरकार बनाई. कहा जाता है यहां से ऑपरेशन लोटस की शुरूआत हुई.

ये तो हुई साल 2004 की बात जब ये नाम सबसे पहले सामने आया था लेकिन साल 2014 में बीजेपी की केंद्र में सरकार बनने के बाद ऑपरेशन लोटस का जमकर इस्तेमाल किया गया और एक के बाद एक राज्यों की सरकार हिलाई गईं. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और उत्तराखंड ये कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर बीजेपी ने या तो अपना कमल खिलाया या फिर पूरी कोशिश की और सफल नहीं हो पाई. तो आइए जानते हैं इन राज्यों में आखिर क्या हुआ था.

सबसे पहले बात करते हैं महाराष्ट्र की जहां पर ऑपरेशन लोटस की चर्चा इस समय हो रही है.

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. शिवसेना से अनबन के बाद वो अपनी सरकार बचा नहीं पाई और शिवसेना के नेतृत्व में महाआघाड़ी गठबंधन ने सरकार बना ली. यहां बीजेपी ने सरकार बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा लिया लेकिन सफल नहीं हो पाई. लेकिन हाल ही में राज्यसभा और एमएलसी के चुनाव के बाद एक बार फिर से बीजेपी सक्रिय हो गई है और यहां फिर से सरकार बनाने की कोशिश जारी है. इसीलिए यहां कहा जा रहा है कि बीजेपी का ऑपरेशन लोटस फिर से सक्रिय हो गया है. विपक्षी दल ऐसा आरोप लगा रहे हैं.

कर्नाटक

साल 2018 की बात है कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन सरकार बनाने के सपने को पूरा नहीं कर पाई. उस समय जेडीएस और कांग्रेस ने बीजेपी पर अपने विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया था. आरोप लगाने के एक साल बाद इन दोनों पार्टियों के कई विधायकों ने एकसाथ इस्तीफा दे दिया जिससे कुमारस्वामी की सरकार गिर गई. इसी मौके का फायदा उठाकर बीजेपी ने कर्नाटक में अपनी सरकार बना ली. इसके बाद विपक्ष ने बीजेपी पर ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाया था.

मध्य प्रदेश

साल 2018 में मध्य प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हुआ. यहां हुए विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद कांग्रेस को सत्ता में वापस आने का मौका मिला था और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने. इसके बाद कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत का सामना करना पड़ा. बीजेपी ने इस चीज का फायदा उठा लिया और ऑपरेशन लोटस के तहत सिंधिया ग्रुप के 22 विधायकों को अपनी तरफ खींच लिया. कांग्रेस की सरकार गिर गई और बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिल गया.

मणिपुर

साल 2017, विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई. कांग्रेस ने 28 सीटें जीतीं जबकि बीजेपी ने 21 लेकिन कांग्रेस मणिपुर में भी बगावत का शिकार बनी और बीजेपी ने नगा पीपुल्स फ्रंट पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली.

गोवा

साल 2017 में ही गोवा में भी कांग्रेस सबड़ीबसे पार्टी बनी लेकिन यहां फिर से कांग्रेस सरकार बनाने में असफल रही. यहां भी बीजेपी पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगा और कांग्रेस के 10 विधायकों ने एक साथ गवर्नर को अपना इस्तीफा सौंप दिया और बीजेपी ने सत्ता में वापसी कर ली.

राजस्थान में भी लगे आरोप

राजस्थान में सरकार बनने के बाद से ही पायलट और गहलोत की अंतकर्लह सार्वजनिक मंच पर कई बार खुलकर सामने आई. मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान में सचिन पायलट की नाराजगी का फायदा उठाने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन ये कोशिशें सफल नहीं हो पाई. एक राजनीतिक घटनाक्रम में सचिन पायलट पार्टी से नाराजगी के चलते अपने 30 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए थे. बीजेपी मौके का फायदा उठाना चाहती थी, लेकिन मध्य प्रदेश की घटना से सीख लेते हुए कांग्रेस के आलाकमान ने बिना देरी के सचिन पायलट को मनाया और उनकी नाराजगी दूर की, जिसके चलते बीजेपी राजस्थान में सरकार नहीं बना पाई. यहां सत्ताधारी दल ने दावा किया कि बीजेपी का ऑपरेशन कमल फेल हो गया.

उत्तराखंड

साल 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को 9 विधायकों के विद्रोह में उलझा दिया गया था. इन विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्य ठहरा दिया इसके बाद, कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया गया और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया गया. उस वक्त कांग्रेस ने बगावत के पीछे बीजेपी का हाथ होने का आरोप लगाया था. बागी विधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो गए.

अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में भी 2016 में बीजेपी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन में कांग्रेस (Congress) विधायक चले गए थे जिसके बाद वहां सत्ता में बदलाव आ गया था. इसमें कांग्रेस के 42 विधायक बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में शामिल हो गए थे.