December 3, 2022

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श्रीलंका के लिए बाहरी मदद पाना क्‍यों हो रहा है मुश्किल

श्रीलंका की खराब होती स्थिति कब सही होगी इस बारे में फिलहाल कहना काफी मुश्किल है। श्रीलंका पर 56 अरब डालर का विदेशी कर्ज है। इसके केवल ब्‍याज को ही उसको दो अरब डालर की दरकार है। इस कर्ज में हजारों करोड़ का कर्ज भारत का भी है। श्रीलंका साफ कर चुका है वो विदेशी कर्ज को उतार पाने में पूरी तरह से असमर्थ है। इसलिए समस्‍या आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकती है। हालांकि श्रीलंका आईएमएफ से कर्ज को लेकर बातचीत कर रहा है। लेकिन उसको कर्ज मिलने की दिशा में एक सबसे बड़ी बाधा है। ये बाधा श्रीलंका में स्थिर सरकार का ना होना है। स्थिर सरकार न होने की वजह से श्रीलंका को कर्ज मिलने में बाधा हो रही है। मौजूदा समय में श्रीलंका के पीएम महिंदा राजपक्षे अपने पद से इस्‍तीफा दे चुके हैं। घर फूंके जाने के बाद राजपक्षे ने एक नेवल बेस में शरण ले रखी है। इस पूरी घटना के बाद क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने पीएम की सिक्‍योरिटी में लगे अधिकारियों को समन भेज कर अपना बयान दर्ज कराने को कहा है। बता दें कि सोमवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उनके घर को आग लगा दी गई थी। श्रीलंका की खराब होती स्थिति के बाद राजधानी में ‘MinaGoGama’ और ‘GotaGoGama’ के नारे भी लग रहे हैं। बहरहाल, मौजूदा समय में श्रीलंका का आलम ऐसा है कि कोई भी देश उसको चाहते हुए मदद नहीं कर पा रहा है। जब तक देश में एक मजबूत सरकार का गठन नहीं हो जाता है तब तक इस दिशा में किसी के लिए भी आगे बढ़ना काफी मुश्किल होगा। भारत की ही बात करें तो जितना कर्ज श्रीलंका के ऊपर है उसके लिए अकेला भारत ही पालनहार साबित नहीं होगा। इसके लिए वैश्विक एजेंसियों को आगे आना होगा। लेकिन इसके लिए भी एक सरकार से ही बात करने नियमों को तय करना जरूरी होगा, जो फिलहाल संभव होता दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि जवाहरलाल नेहरू के प्रोफेसर बीआर दीपक का कहना है कि श्रीलंका की नई सरकार में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। यदि वो एक स्थिर सरकार दे पाई तो इस संकट से श्रीलंका का निकलपाना भी संभव हो जाएगा।