पाकिस्तान में सियासी घटनाक्रम बहुत तेजी से बदल रहे हैं। इमरान खान की गठबंधन सरकार से दो दलों ने समर्थन वापस ले लिया है, इससे उनकी विदाई तय हो गई है। हालांकि, संसद में बहुमत गंवा चुके इमरान खान अब भी अपनी सरकार बचाने की कोशिशों में जुटे हैं।
“पाकिस्तान में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और प्रधानमंत्री इमरान खान के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। अभी ऐसा लगता है कि इमरान के पास दो ही विकल्प हैं। पहला तो ये कि वे इस्तीफा दे दें और दूसरा ये कि वे किसी तरह अपने गठबंधन की संख्या पूरी कर लें। मौजूदा हालात में दूसरा विकल्प असंभव नजर आ रहा है।”
इमरान खान पाकिस्तान के चर्चित क्रिकेटर रहे हैं। पाकिस्तान को वर्ल्ड कप जिता चुके हैं। 2018 में जब वो सत्ता में आए थे तो उन्होंने पाकिस्तान को नई उम्मीद दी थी, लेकिन अब साढ़े तीन साल बाद वो एक बेगाने की तरह सत्ता से बाहर होते दिख रहे हैं।
‘नया पाकिस्तान’ बनाने का वादा करने वाले इमरान खान भी पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार के कार्यकाल पूरा न कर पाने के मिथक को नहीं तोड़ पाए।
“इमरान खान करीब साढ़े तीन साल सत्ता में रहे। इस दौरान लगातार वो अपने आप को मुस्लिम वर्ल्ड या मुस्लिम उम्मा (दुनियाभर के मुसलमान) के नेता के तौर पर पेश करते रहे, लेकिन ना ही उन्होंने अपने देश के लिए कुछ खास किया और ना ही मुस्लिम वर्ल्ड के लिए कुछ कर सके।”
“इमरान खान के साथ एक मसला और ये हुआ कि अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार चली गई। अफगानिस्तान में तालिबान के वापस आने से पाकिस्तान पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। पश्चिमी देश और पूरी दुनिया पाकिस्तान से अधिक भूमिका निभाने की मांग करने लगी। इमरान खान इस दबाव को भी ठीक से नहीं झेल पाए।”
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